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राष्ट्रीय परशुराम परिषद

राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित | राष्ट्रीय परशुराम परिषद | वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः | धर्म, संस्कृति और न्याय के लिए समर्पित |

राष्ट्रीय परशुराम परिषद

ॐ
जय भगवान श्रीपरशुराम
ॐ जामदग्न्याय विद्महे परशुरामाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः। इदं ब्राह्ममिदं क्षात्रं शापादपि शरादपि॥
वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः

राष्ट्रीय परशुराम परिषद का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीपरशुराम के संदेश को विश्व के समस्त सनातनियों के मध्य पहुँचाना व पालन  करना है। न्याय का पालन करने के साथ साथ अन्याय का दृढता से प्रतीकार करना है। वर्तमान परिस्थिति में न्याय के प्रति सजगता का उद्बोधन व अन्याय का दमन ही प्रमुख लक्ष्य है।साथ ही श्रीपरशुराम से संबंधित भ्रामक तथ्यों का निराकरण करना है। वर्तमान भारतवर्ष, बाङ्गलादेश, पाकिस्तान,  अफगानिस्तान प्रभृति अन्य देशों अर्थात पौराणिक कालीन बृहत्तर भारतवर्ष में विद्यमान समस्त श्रीपरशुराम के स्थलों का विवरण प्रस्तुत करना है साथ ही आवश्यकतानुसार  स्थलों का जीर्णोद्धार कर श्रद्धालुओं को भगवान श्री परशुराम के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करना है ।समाज में व्याप्त विषमता, वैमनस्यता कटुता व जातीय विद्वेष का उन्मूलन कर समाज में समरसता का संस्थापन करना है। श्रीपरशुराम के ग्रन्थों व संबंधित ग्रन्थों का प्रकाशन करना है। प्रत्येक सनातनियों के घर में सनातन ग्रन्थों का पठन पाठन कराना है।

सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के मानस पुत्र भृगु के वंशज, भगवान श्रीविष्णु के छठवें अवतार,  महर्षि जमदग्नि व साध्वी रेणुका के पुत्र चिरञ्जीवी श्रीपरशुराम,  पितामह महर्षि ऋचीक के सान्निध्य में विधिवत अध्ययन कर वेद व शास्त्रों में निष्णात हुए एवं  महादेव की वासस्थली कैलास में तपस्या करके शस्त्रों का ज्ञान व विद्युद्भि परशु को प्राप्त किया। त्रेतायुग में भगवान राम को शार्ङ्ग धनुष व द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया। भीष्म पितामह, द्रोण, कर्ण आदि महारथियों को शस्त्रदीक्षा देकर अनुग्रहीत किया। श्रीपरशुरामकल्पसूत्र की संरचना कर भगवती की उपासना के मार्ग को प्रशस्त किया।मन्त्रद्रष्टा श्रीपरशुराम ऋग्वेद के दशम मंडल के ११० वें सूक्त मन्त्र ८ में प्रार्थना करते हैं कि हमारे यज्ञ में  भारती ,  इळा व सरस्वती आदि तीनों देवियाँ, उपस्थित होकर हमें अनुग्रहीत करें।इस मंत्र में इन तीन देवियों को यज्ञ में आह्वान करके उनसे यज्ञ को सफल और कल्याणकारी बनाने की प्रार्थना की गई है जिससे यज्ञकर्ता को धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष प्राप्त हो सके।

शास्त्र व शस्त्र दोनों विद्याओं में निष्णात भगवान श्री परशुराम न केवल मानवों के प्रति अपितु समस्त जीवराशियों के हितचिन्तक हैं। अन्याय का प्रतीकार व न्याय का संरक्षण ही उनका प्रमुख सन्देश है।वर्णाश्रम धर्म संरक्षणपूर्वक समस्त मानव जगत का कल्याणविधान  ही उनके जीवन का परम लक्ष्य है। भगवान श्री परशुराम का व्यक्तित्व  त्याग, तपस्या, शौर्य, और धर्म के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। न्याय, संतुलन और शक्ति के आदर्श हैं।

राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए परिषद के दो अनुषांगिक संगठन हैं

राष्ट्रीय परशुराम परिषद एक राष्ट्रीय सामाजिक संगठन है जिसके संस्थापक पंडित सुनील भराला जी हैं।

भगवान श्रीपरशुराम का संदेश

राष्ट्रीय परशुराम परिषद चिरञ्जीवी भगवान श्रीपरशुराम को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए प्रार्थना करता है कि  हम सभी सनातनियों में कर्तव्य व न्याय की ऊर्जा को संचारित कर सदैव रक्षा करें ।

सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।
जय श्री परशुराम। जय जय श्री परशुराम।वरना।

महाकुंभ 2025

प्रयागराज में कुंभ मेले का आयोजन वर्ष 2025 में 13 जनवरी से होगा। महाकुंभ मेले का आयोजन हर 12 साल में किया जाता है। इससे पहले यह आयोजन वर्ष 2013 में हुआ था।

इसे मेले का संबंध ज्‍योतिष और आस्‍था दोनों से माना जाता है।साल 2025 में बृहस्‍पति वृष राशि में होगा। सूर्य और चन्द्रमा के मकर राशि में प्रवेश करने पर महाकुंभ मेले का आयोजन होता है। साल 2025 में यह संयोग बनेगा और तब 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक यह मेला लगेगा।

महाकुंभ प्रयागराज में राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के नि.राज्य मंत्री माननीय पंडित सुनील भराला जी के मार्गदर्शन, प्रेरणादायक नेतृत्व तथा उनके संगठनात्मक कौशल से भव्य एवं सुव्यवस्थित दिव्य कुम्भ में भगवान परशुराम जी का काज सम्पन्न हुआ।

राष्ट्रीय परशुराम परिषद के नई दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मानित श्रीमती  डॉ. चिदात्मा जी व लंदन, इंग्लैड से पधारे ब्रिटिश तमिल फोरम के महासचिव श्री वी. रवि कुमार एवं वशीकरण जी से भेंट कर उन्हें राष्ट्रीय परशुराम परिषद महाकुंभ कैंप में प्राण प्रतिष्ठित प्रतिष्ठित भगवान श्री परशुराम जी की प्रतिमा व चालीसा भेट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय परशुराम परिषद के राष्ट्रीय सहसंयोजक श्री विनय शर्मा जी राष्ट्रीय परशुराम परिषद धर्म प्रकाश के सहसंयोजक राजपुरोहित आचार्य जी मधुर सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित है।

जानापाव - महर्षि परशुराम जी की जन्म स्थली

राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक संरक्षक आदरणीय श्री सुनील भराला जी राष्ट्रीय परशुराम परिषद मुख्यालय नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय परशुराम परिषद शोध पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य श्री कृष्णन जी चेन्नई द्वारा जो परिश्रम पिछले कई वर्षों से इस विषय पर किया गया कि भगवान परशुराम की जन्मस्थली कर्मस्थली ज्ञानस्थली और युद्ध स्थल कहां पर है?

महाकुंभ 2025

कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा तीर्थ और त्यौहार है। यह आयोजन एक धार्मिक और सांस्कृतिक तमाशा है जो 12 साल में एक बार होता है और दुनिया भर से प्रतिभागियों को गंगा, यमुना और रहस्यमयी सरस्वती के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए आकर्षित करता है। महाकुंभ महोत्सव 2013 को मानव जाति के इतिहास में सबसे बड़े समागमों में से एक माना जाता है।

महाकुंभ 2025

कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा तीर्थ और त्यौहार है। यह आयोजन एक धार्मिक और सांस्कृतिक तमाशा है जो 12 साल में एक बार होता है और दुनिया भर से प्रतिभागियों को गंगा, यमुना और रहस्यमयी सरस्वती के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए आकर्षित करता है। महाकुंभ महोत्सव 2013 को मानव जाति के इतिहास में सबसे बड़े समागमों में से एक माना जाता है।

भगवान परशुराम राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी एवं संत समागम

भगवान परशुराम को लेकर फैली मिथ्याओं को तोड़ने जुटे संत माननीय पंडित श्री Pandit Sunil Bharala  जी के मार्गदर्शन से राष्ट्रीय परशुराम परिषद द्वारा हरिद्वार में भगवान परशुराम राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी एवं संत समागम का आयोजन हुआ 

राष्ट्रीय परशुराम परिषद अखिल भारतीय दो दिवसीय चिंतन वर्ग का प्रथम सत्र का शुभारंभ हुआ जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने संगठनात्मक विषय पर चर्चा कर अपने विचार रखें।

वाराणसी-उद्घोष l भगवान श्री परशुराम जी की जन्मस्थली, तपोस्थली, युद्धस्थली व कर्मस्थली का हरिद्वार में संपन्न भगवान-परशुराम-शोध-संगोष्ठी के प्रतिफल स्वरूप 20 नवंबर को वाराणसी में होगा विधिवत उद्घोष।

राष्ट्रीय परशुराम परिषद्

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